कावडियों का तांडव मतलब तांडव कोई डांस नहीं !

सावन का पवित्र मास चल रहा है और हर कोई भोले को खुश करने की सोच रहा हैं।भोले शंकर खुश हैं या नहीं ये तो पता नहीं, पर काफी लोग नाखुश भी है, ये पता लग जाता है।

अभी कल में देहरादून से निकला था ऋषिकेश नीलकण्ठ होते हुए भिर्गुखाल के लिए तो में देहरादून से लेकर ऋषिकेश तक इनकी हरकतों से परेशान था। ऋषिकेश नटराज चौक पर पहुंचा तो और भी ज्यादा हुड़दंग। ट्रक के ट्रक डीजे सिस्टम से लदे हुए। नटराज से थोड़ा आगे ढालवाला की तरफ अपनी बाइक को मोड़ दिया ये सोच कर की शायद इस रूट पर शान्ति मिलेगी पर लगता था शान्ति को में देहरादून ही भूल गया था।

नटराज के आगे चंद्रभागा नदी पर एक पुल है वहाँ पर मित्र पुलिस का जत्था खड़ा था और सभी डीजे वाले ट्रक , मैजिक आदि को आगे जाने से रोक दिया गया। इन लोगों की हठ धर्मिता तो देखों पार्किंग में ही जनरेटर लगा के खड़े ट्रक में डीजे चालू। और डीजे के साउंड सिस्टम का वोल्युम और बेस भले ही भोले बाबा को तांडव करने पे मजबूर करे या न करें पर नगर क्षेत्र में निवासित कही बुजुर्ग लोगों से लेकर बच्चे तक , बच्चे क्या में खुद तांडव करने को राजी था।

तांडव मतलब तांडव कोई डांस नहीं।मन किया कि इनको भोले की भक्ति की परिभाषा समझा के आउ पर अपने कमजोर शरीर को देख कर मुझें ही अपने मन की परिभाषा बदलनी पड़ी। खेर में कमजोर था पर मेरे देश का शासन और प्रशाशन तो कमजोर नहीं था। चंद लोग अपनी मांग को लेकर अगर शासन के द्धार खटखटाते हैं तो प्रशासन का डंडा उन लोगों पर जम के बरसता है, पर जो लोग भोले के पास अपनी मांग लेकर जाते है उनके लिए प्रशासन का डंडा कहाँ है।

खैर इसे भूल कर में ढालवाला से आगे निकला तो sbi के पास एक और पुलिस की टीम। में सही था तो मुझे कोई डर भी नहीं था और उन लोगों ने मुझे भी नहीं रोका। sbi से करीब आगे 1km आगे भद्रकाली मंदिर जहाँ से नरेंद्रनगर का रास्ता जाता है वहाँ से कुछ मीटर पहले मुझें भी मित्र पुलिस ने रोक दिया, में अकेला भी था और हैलमेट पहन के चलता हूँ, और मेरी बाइक के आगे प्रेस भी लिखा था जो आज की तारीख में गलत है ,

हैलमेट पहनना नहीं अपने वाहन पर प्रेस लिखना, पर मेरा बाइक का रजिस्ट्रेसन no दिल्ली का है तो शायद वो मुझे भी कावड़िये समझ बैठे, गढ़वाली में दो शब्द बोले तो बंधुओं ने मुझे आगे जाने की इजाजत दे दी। पर लगता था आज मेरी मुश्किल का कोई ठिकाना नहीं था। कैलाश गेट तक कावड़ियों की बाइक की फ़ौज पे फ़ौज। डीजे का साऊंड उतना परेशान नहीं कर रहा था जितना इनमें से कुछ लोगों की बाइक की आवाज।

जान भुझ कर ये लोग अपने बाइक का साइलेंसर खुला कर देते हैं। और पूरी यात्रा पर आये काफी लोगो की गाली का शिकार बनते हैं। खेर इनकी फट फट की आवाज मुझे मुनिकीरेती तक झेलने की आवश्यकता पड़ी पर जैसे ही में शिवपुरी से करीब 9 km पीछे नीलकंठ by पास पहुँचा तो एक और मुसीबत गले पड़ गयी। यहाँ भी मित्र पुलिस के जवानों से ले कर आला अधिकारियों के साथ होमगार्ड के जवान भी मोर्चे पर थे। राईट टर्न लेते ही जवान का गाड़ी रोकने का इशारा ।

गाड़ी साइड लगा के इंस्पेक्टर साहब के पास गया कि क्यों रोक रहे हो तो साहिब ही हम से चिढ़ गए , प्यार से समझाया कि चौहान साहब मुझें भिर्गुखाल जाना हैं। तो वही, बोले बैराज हो के आओ जहाँ में खड़ा था मुश्किल से 2 मिनट भी नहीं लगते थे पर साहब भी कुछ परिचितो को जाने दे रहे थे पर कुछ लोगों की तरह में भी नहीं जा पाया पर मुझे पता था कि अगर में वापिस जाता भी हूं तो मुझे वही हाल ऋषिकेश तक जाने में लग जाएगा जो में झेल कर आया था।

ऊपर से aims hospital तक वही कावड़ियों की फ़ौज जिनका कानून से कोई सम्बन्ध नहीं होता। ट्रिपल राइडिंग, बिना हैलमेट के यात्रा, पॉल्यूशन की चिंता ( ध्वनि प्रदूषण ) ऊपर से ड्रिंक & ड्राइव।। इनको कोई फर्क नहीं पड़ता पर दूसरा ब्यक्ति जो घर पर चैन से लेटा हुआ है उनकी चिंता तो करो। कुछ देर रुका रहा और आखिर में मुझें चौहान जी जिनके कंधे पर तीन सितारा थे जाने दे दिया तो आगे जा के देखा पूरी रोड पुलिया तक खाली।

बस पुलिया क्रोस की तो वहाँ भी भारी पुलिस बल तैनात। में अपनी बाइक पर था पर उन लोगों ने मुझे नहीं रोका बस उन से कुछ 10 कदम की दूरी पर कुछ लोग पर्चियां काट रहे थे टोल टैक्स की मुझे भी रोका गया पर किसी सज्जन कर्मचारी द्वारा मुझें जानें का इशारा किया तो में भी निकल गया ।

खैर मुझें उस के बाद काफी कांवड़ वाले दिखें पर अधिकांश मस्त नजर आये । और आप भी अगर कावड़ियों के हाहाकार से परिचित नहीं हैं तो अपने गाँव क्षेत्र की उन महिलाओं को देख लो जो आजकल भोले भंडारी को बेलपत्री के साथ साथ भाँग पत्री का भी अभिषेक दे रही है इनमें भी अधिकांश वो महिलाएं हैं जो उत्तराखंड में नशे का विरोध करके अपनी राजनीति चमका रही हैं।

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