भारतीय जीवन शैली का अटूटा हिस्सा है योग

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन परमार्थ निकेतन में साधकों ने कुंडलिनी और हठ योग के बारे में जाना। एरोमा थिरेपिस्ट डॉ. अंजना भगत ने भावनाओं के संतुलन के बारे में बताया।
कुंडलिनी, हठ योग और पावर प्राणायाम का अभ्यास कराते गुरुशब्द सिंह ने इससे जुड़ी सावधानियां भी बताईं। उन्होंने कहा कि कुंडलिनी योग का गुरु के सानिध्य में किया जाना सुरक्षित है। चीन के कृष्णमूर्ति मोहन राज ने हठ योग का अभ्यास कराया, वहीं योगीराज विश्वपाल जयंत ने पावर-प्राणायाम और कैलिफोर्निया की लौरा प्लम्ब ने योग ऑफ लव का अभ्यास कराया।

योगाचार्य स्वामी भक्ति आलोक, ब्राइन सिद्धार्थ इंगले, भरत व एरिका ने योग की विभिन्न नई मुद्राओं का प्रशिक्षण दिया। योगासन का अभ्यास कराते हुए योगी किया मिलर ने कहा कि योगासनों से मनुष्य के अंत:करण में निहित शक्तियों का उद्भव होता है। इटली की फ्रान्सेस्का केसिया ने हैपी हिप्स फ्लो योग का अभ्यास कराया जबकि कनाडा की ग्लोरिया लैथम ने चक्रों के माध्यम से जीवन यात्रा की जानकारी दी।

योग और प्राणायाम भारतीय जीवन पद्धति का अटूटा हिस्सा रहा है। भारत के वेद और पुराणों में योग दर्शन का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के गंगा रिसॉर्ट में योग महोत्सव के तीसरे दिन साधकों को योग का इतिहास समझाते हुए योगाचार्य सीएम भंडारी ने उसकी उत्पत्ति के बारे में जानकारी दी।

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