पंच प्रयागों में विशेष स्थान है कर्णप्रयाग का

कुरूक्षेत्र युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने किया था कर्ण का दाह संस्कार अलकनंदा तथा पिण्डर नदियों के संगम पर

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त्रियुगीनारायण

उत्तराखण्ड,  जो  देवताओं  का निवास स्थान माना जाता है यहाँ कई ऋषि – मुनियों ने अपनी कठोर तपस्या से स्वयं

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ताड़केश्वर महादेव

उत्तराखण्ड को देव भूमि, नाम से संबोधित करने का सबसे बड़ा कारण है यह की यहाँ पर हिन्दू मानयता यहाँ

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पंच केदार

हिमालय की गोद में स्थित राज्य उत्तराखंड जहाँ भिन्न भिन्न प्रकार की जातियाँ पायी जाती है। प्रकृति के वरदान से

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केदारनाथ मंदिर का इतिहास

हिन्दुओं के चार धाम हैं- द्वारिका, रामेश्वरम, जगन्नाथपुरी और बद्रीनाथ। उत्तर भारत के कुछ लोगों अर्थाभाव के कारण यही सम्मान

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देवप्रयाग (भागीरथी तथा अलकनंदा का पावन संगम )

सदियों से दुनिया को अध्यात्म की शिक्षा देता भारत जहाँ प्रकृति को ईश्वर की भांति पूजा जाता है। जहाँ भूमि

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चिपको आंदोलन

प्रकृति, जिसके आगे हम सभी नतमस्तक है। पृथ्वी पर जीवन बसाने वाली प्रकृति नदियों , झीलों , पर्वतो , पेड़ो

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चार धाम

भारत भूमि में स्थित चार धाम – बद्रीनाथ , द्वारिका , जगरनाथपुरी और रामेश्वरम, जहाँ हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार

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